
श्रवणआकाश, खगड़िया. राष्ट्रीय युवा दिवस के पावन अवसर पर गायत्री शक्तिपीठ के अतिप्राचीन एवं आध्यात्मिक परिसर में सोमवार को युवाओं का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। सैकड़ों की संख्या में उपस्थित युवाओं, गायत्री परिजनों और गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी मौजूदगी में विशेष कार्यक्रम समारोह का भव्य आयोजन किया गया। पूरा परिसर देशभक्ति, संस्कार, सेवा और राष्ट्र निर्माण के ओजस्वी नारों से गूंज उठा, जिससे वातावरण प्रेरणादायी बन गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला न्यायाधीश मनोज द्विवेदी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज का युवा यदि नैतिकता, अनुशासन और सेवा भावना को अपने जीवन का मूल मंत्र बना ले, तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई शक्ति नहीं रोक सकती। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र की रीढ़ है और यही शक्ति भारत के उज्ज्वल भविष्य की दिशा तय करेगी। विशिष्ट अतिथि शलेन्द्र कुमार, संजीव डोम तथा डीएवी स्कूल की प्राचार्या उमा मिश्रा ने शिक्षा, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और निरंतर परिश्रम से ही युवा अपनी पहचान बना सकता है। शिक्षा के साथ संस्कार जुड़ जाएं, तो समाज और राष्ट्र स्वतः सशक्त बनता है।
वरिष्ठ गायत्री परिजन डा. अमोद कुमार एवं अरविन्द प्रसाद हिमाणु ने अपने विचार रखते हुए कहा कि गायत्री परिवार का उद्देश्य केवल आध्यात्मिक चेतना जगाना ही नहीं, बल्कि चरित्रवान, कर्मठ और राष्ट्रभक्त युवाओं का निर्माण करना है। उन्होंने युवाओं से नशा, हिंसा और भटकाव से दूर रहकर सेवा, साधना और सदाचार के मार्ग पर चलने की अपील की। जिला युवा संयोजक अमित कुमार ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आज का समय संगठित होकर सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ निर्णायक संघर्ष करने का है। युवाओं को आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभानी होगी और समाज में सकारात्मक बदलाव का वाहक बननाहोगा।
इस अवसर पर युवा प्रकोष्ठ सदस्य मोती लाल सिंह, अनिल कुमार जयसवाल, ब्रह्मानंद ओझा, रंजन कुमार, राजीव कुमार, कोशल कुमार सहित राजा, संजीव, अखिलेश, अभिनन, पीयूष, बंटी, नीतिश, नीरज और बड़ी संख्या में गायत्री परिजन व युवा मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन सामूहिक प्रार्थना और राष्ट्र निर्माण के दृढ़ संकल्प के साथ हुआ। युवाओं ने एक स्वर में समाज, राष्ट्र और मानवता की सेवा के लिए जीवन समर्पित करने का प्रण लिया, जिससे यह आयोजन एक ऐतिहासिक और प्रेरणास्रोत कार्यक्रम के रूप में यादगार बन गया।

