नवगछिया के आंगनबाड़ी बच्चों ने बिखेरी प्रतिभा, संविधान की प्रस्तावना सुनाकर जीता दिल

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भागलपुर, 19 मार्च 2025 – नवगछिया प्रखंड अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्र 48 के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने अपनी अद्भुत प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस विशेष कार्यक्रम में बच्चों ने गुड मॉर्निंग से लेकर संविधान की प्रस्तावना तक प्रस्तुत कर सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी मासूमियत और आत्मविश्वास से भरी प्रस्तुति को देखकर उपस्थित लोगों ने जोरदार तालियों से सराहा।

बच्चों की शानदार प्रस्तुतियां

कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने अपना नाम, माता-पिता और भाई-बहनों का नाम बताया। इतना ही नहीं, उन्होंने सेविका, सीडीपीओ मैडम, डीएम सर, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और महामहिम राष्ट्रपति के नाम भी पूरी स्पष्टता के साथ गिनाए।

इसके अलावा, बच्चों ने कविता, कहानी और गिनती भी सुनाई, जिससे उनकी शिक्षा और सीखने की प्रक्रिया को दर्शकों ने सराहा। लेकिन कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक और प्रेरणादायक क्षण तब आया, जब नन्हे बच्चों ने संविधान की प्रस्तावना पूरे आत्मविश्वास के साथ सुनाई।

संविधान की प्रस्तावना के कठिन शब्दों को छोटे बच्चों के मुंह से सुनकर श्रोता भाव-विभोर हो गए और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा माहौल गूंज उठा।

बाल विकास परियोजना पदाधिकारी ने की सराहना

इस कार्यक्रम का नेतृत्व बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) चंचला कुमारी ने स्वयं किया। उन्होंने कहा, “आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को केवल पोषण ही नहीं, बल्कि बौद्धिक और सामाजिक विकास की दिशा में भी तैयार किया जाता है। इन बच्चों ने आज जिस तरह आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुति दी, वह हम सभी के लिए गर्व की बात है।”

बच्चों का आत्मविश्वास बना आकर्षण का केंद्र

बच्चों की प्रस्तुति में जोश, आत्मविश्वास और सीखने की ललक साफ झलक रही थी। वे न केवल याद की हुई चीजें सुना रहे थे, बल्कि अपनी बातों को सशक्त तरीके से प्रस्तुत भी कर रहे थे।

कार्यक्रम में उपस्थित दर्शकों ने कहा कि “यह देखकर खुशी होती है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को इस तरह आत्मनिर्भर और जागरूक बनाया जा रहा है।”

शिक्षा और संस्कार का अनूठा संगम

आंगनबाड़ी केंद्रों में इस तरह की गतिविधियां बच्चों को सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रखतीं, बल्कि उनके आत्मविश्वास और समाज में अपनी बात रखने की क्षमता को भी विकसित करती हैं।

नवगछिया के इन नन्हे सितारों ने अपनी प्रस्तुति से यह साबित कर दिया कि अगर सही मार्गदर्शन मिले, तो बचपन से ही ज्ञान, संस्कार और आत्मविश्वास को मजबूत किया जा सकता है।

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