न्यूज डेस्क
जिन्दगी की दौड़
दौडते देखा जिसे बस,हाँफते देखा उसे।काँपते पैरो से फिर,धरा को नापते देखा उसे।।सच्चाई सबकी है यही,हांथ खाली ही रहा।जिसके लिए…
तू आफ़ताब है
आँखों में चाँद तू लेकर चलती है।लड़की है या तू कोई अप्सरा है। क्या कहे तेरे नूर ए हुस्न के…
श्रम ही मेरी पूजा है
श्रम ही मेरी पूजा है,मेहनत मेरा ईमान।श्रम ही मेरा धर्म है।श्रम बिंदु मेरी पहिचान।। श्रम ही मेरी गीता है।श्रम ही…
अधूरी ख्वाहिशें
अधूरी ख्वाहिशें में पूरी कर लूँ।ज़िंदगी तुझे में जी भर कर जी लूँ। बिस्तर पर तो हर रात गुज़ारी हैआज…

