महाकुंभ पर सबसे विस्तृत शोध ग्रन्थ ‘महाकुंभ का महामंथन’ तैयार —सनातन परंपरा का वैश्विक दस्तावेज

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रामायण रिसर्च काउंसिल ने महाकुंभ जैसे विराट और ऐतिहासिक आयोजन पर अब तक का सबसे विस्तृत, शोधपरक एवं आकर्षक साहित्य ‘महाकुंभ का महामंथन’ तैयार किया है। यह कृति आने वाली पीढ़ियों के लिए सनातन परंपरा का प्रामाणिक संदर्भ मानी जा रही है।


इस साहित्य का मूल कॉन्सेप्ट 11 वर्षीय बाल-व्यास वैदेहीनंदन पंडित वेदांत द्वारा प्रस्तुत किया गया था। काउंसिल के सचिव पितांबर मिश्र ने बताया कि ग्रंथ में महाकुंभ, अखाड़ा परंपरा और स्नान से जुड़े आध्यात्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक पक्षों को शोध के साथ संकलित किया गया है, ताकि भविष्य में विद्यार्थी और शोधकर्ता इसका लाभ उठा सकें।
जयराम विप्लव ने बताया दूरदर्शी और ऐतिहासिक प्रयास
काउंसिल के राष्ट्रीय युवा संयोजक एवं भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया पैनलिस्ट जयराम विप्लव ने कहा कि इस साहित्य में महाकुंभ की तैयारी, प्रशासनिक प्रबंधन, आयोजन प्रक्रिया और इसके वैश्विक संदेश को क्रमबद्ध और तथ्यात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और डबल-इंजन सरकार के कुशल प्रबंधन के कारण ही यह विराट आयोजन सफल हुआ, जिसे इस दस्तावेज में प्रभावी रूप से दर्ज किया गया है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और वैश्विक प्रस्तुति
जयराम विप्लव ने बताया कि महाकुंभ से जुड़ी सामग्री के डिजिटल प्रसार के लिए www.mahakumbhinfo.com वेबसाइट विकसित की गई है। काउंसिल की इच्छा है कि इसकी पहली प्रति प्रधानमंत्री को भेंट करने के बाद ही इसे जनमानस के लिए जारी किया जाए।


काउंसिल के ट्रस्टी देव रत्न शर्मा ने बताया कि यह साहित्य हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में तैयार किया गया है, ताकि इसे अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचाया जा सके। वहीं ट्रस्टी अंबर अग्रवाल ने बताया कि प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान काउंसिल को सेक्टर-23 में स्थान आवंटित किया गया था, जिसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया।
आगामी कुंभों पर भी होगा ऐसा ही कार्य
काउंसिल ने घोषणा की है कि भविष्य में नासिक, हरिद्वार और उज्जैन में आयोजित होने वाले कुंभ मेलों पर भी इसी प्रकार के शोधपरक दस्तावेज तैयार किए जाएंगे।

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