गुम हो जाता हूँ
तुझे याद ऱखकर मैं सब भूल जाता हूँ।अपने ही अंदर कही गुम हो जता हूँ। जब तुम मेरी कविताएँ पढ़ती…
तुझे याद ऱखकर मैं सब भूल जाता हूँ।अपने ही अंदर कही गुम हो जता हूँ। जब तुम मेरी कविताएँ पढ़ती…
आसमां रो रहा हैआंसू समंदर बना रहा हैसूर्य ताप से झुलस पानीवाष्पित हो बादल बना हैघनघोर घटा छलक छलकअवनि अम्बर…
दिसम्बर जा रहा है जैसे फूलों से खुशबू जा रही है।ठीक वैसे ही दिसम्बर जा रहा है। कोई हमें पाग़ल…
कविता-कानन साहित्य कला मंच के द्वारा 09/12/2021को समकालीन हिन्दी कविता के महत्वपूर्ण स्तंभ रघुवीर सहाय के जन्मदिन के अवसर पर…
चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (तमिल: சக்ரவர்தி ராஜகோபாலாச்சாரி) (दिसम्बर १०, १८७८ – दिसम्बर २५, १९७२) भारत के वकील, लेखक, राजनीतिज्ञ और दार्शनिक थे।…
कोटि नमन हो उन चरणों मेंदेश के हित जो पग चलेऐसा ना कोई पुष्प जगत मेंजो इनका पद वंदन करें।सदा…
नशा मुक्त हो सारा जहां!नशा नाश का कारण, अहित सदा ही करता हैं,धन, दौलत,इज्जत सबकुछ माटी मोल कर देता हैं।परिवार…