मंगल पाण्डे
( 10 मई 1857 की क्रांति के महानायक क्रांतिकारी देशभक्त मंगल पांडे जी को समर्पित ) आओ सुनाऊ एक कहानी…
( 10 मई 1857 की क्रांति के महानायक क्रांतिकारी देशभक्त मंगल पांडे जी को समर्पित ) आओ सुनाऊ एक कहानी…
घटु ते भलुके जनमीं तुमहीं ,घटहीं महिं वासि करौ तनि माईं । बनमा भटकीं प्रभुके सथवा ,पथु कै दुखवा मनवा…
कहूं कैसे मैंमाता की ममता कोकुछ शब्दों में बढ़ाती है जोसदा हौसला मेरामुसीबतों में कोसों दूर सेजान लेती है वो…
जब माँ की कोख में उसका अंश पलता है ,माँ का तन ,मन ,रोम- रोम पिघलता हैकष्ट पीड़ा चुभन से…
क्षण में तुम राधा बन, मधुवन में रास रचाती।क्षण में कैकयी बन, दशरथ पुत्र को ठुकराती।क्षण में सीता बन, रो-रो…