साहित्यकविता कानन

ओ रामजी, बड़ा दुःख दी ना

ओ रामजी, बड़ा दुःख दी ना

तेरे इस कोरोना ने, बड़ा दुःख दी ना

तेरे कोरोना ने, बड़ा दुःख दी ना

सुध बुध बिसरायी, सबकी नींदे चुराई

सबका मुश्किल कर दिया जीना

बड़ा दुःख दी ना

तेरे कोरोना ने बड़ा दुःख दी ना

ओ रामजी, बड़ा दुःख दी ना

वो वायरस है, मैं इंसान हूँ

वो वायरस है, मैं इंसान हूँ

वो हँसता है, मैं रोता हूँ

मेरे दर्द की कदर उसे होगी मगर

मुझे ज़ेहेर पड़ेगा पीना

बड़ा दुःख दी ना, बड़ा दुःख दी ना

तेरे कोरोना ने बड़ा दुःख दी ना

सबकी अँखियाँ, सबके सपने

सबकी अँखियाँ, सबके सपने

ले गया सब कुछ साथ वो अपने

ये जाने निगोड़ी जाने काहे को छोड़ी

इस वायरस ने सब कुछ छीना

बड़ा दुःख दी ना, बड़ा दुःख दी ना

तेरे कोरोना ने बड़ा दुःख दी ना

सा ग रे सा, सा ग म प

ग म प प म ग ग सा

सुनकर मेरी राम दुहाई

सुनकर मेरी राम दुहाई

देखो वो फिर भी नहीं जा रहा हरजाई

निर्मोही ये कैसा जो मैं जनता ऐसा

तो मैं जाता भीड़ में कभी ना

बड़ा दुःख दी ना

तेरे कोरोना ने बड़ा दुःख दी ना

बड़ा दुःख दी ना

किस कोरोना की बार करते हो तुम?

चीन के कोरोना ने ,चीन के कोने ने

चीन ने ,चीन ने , निगोड़े उस चीन ने

छोटी छोटी आँखों वालों के चीन ने

मम मम मम मम, आ आ आ आ

(चीन ने , चीन ने ….)

बाक़ी कल , अपनी दुआओं में याद रखियेगा 🙏सावधान रहिये-सुरक्षित रहिये ,अपना और अपनों का ध्यान रखिये ,संकट अभी टला नहीं है ,दो गज की दूरी और मास्क 😷 है जरुरी …!

🌹सुप्रभात🙏

“🔱विकास शर्मा’शिवाया ‘”🔱
जयपुर-राजस्थान

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