तीन महीने में दुरुस्त होगा विक्रमशिला सेतु, दिसंबर तक समानांतर पुल पर दौड़ेंगे वाहन

पटना।भागलपुर को उत्तर बिहार से जोड़ने वाला ऐतिहासिक विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त होने के बाद बिहार राज्य पुल निर्माण निगम ने मरम्मत कार्य तीन माह में पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। निगम के अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने सोमवार को सूचना भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बताया कि गिरे हुए स्पैन की मरम्मती में लगभग तीन महीने का समय लगेगा। साथ ही, गंगा नदी पर बन रहे समानांतर नए पुल पर इस वर्ष दिसंबर तक वाहनों का परिचालन शुरू करने की तैयारी है।

डॉ. सिंह ने बताया कि रविवार देर रात करीब 12:30 बजे सेतु के 133 नंबर पिलर के समीप धंसाव शुरू हुआ। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल ट्रैफिक बंद करा दिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। कुछ ही देर बाद पुल का क्षतिग्रस्त हिस्सा पूरी तरह नीचे गिर गया। प्रशासन की सतर्कता की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि समय पर कार्रवाई नहीं होती तो जनहानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था।

घटना के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए पुल निर्माण निगम के कार्यपालक अभियंता को निलंबित कर दिया गया है। अध्यक्ष ने स्वीकार किया कि सेतु पर यातायात का अत्यधिक दबाव था और हाल ही में पटना से भेजी गई जांच टीम ने भी संरचनात्मक खामियों की ओर संकेत किया था। अब मरम्मत कार्य में आईआईटी पटना का तकनीकी सहयोग लिया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
वैकल्पिक यातायात व्यवस्था के तहत दक्षिण बिहार से उत्तर बिहार जाने वाले वाहनों को श्रीकृष्ण सिंह सेतु (मुंगेर) और उत्तर बिहार से भागलपुर आने वाले वाहनों को खगड़िया स्थित गंगा पुल से होकर गुजरने की सलाह दी गई है। फिलहाल भागलपुर-नवगछिया के बीच पीपा पुल बनाने की योजना स्थगित कर दी गई है, क्योंकि मानसून निकट है। नवगछिया से भागलपुर के बीच शीघ्र ही स्टीमर सेवा शुरू करने की भी घोषणा की गई है।
डॉ. सिंह ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से संपर्क कर सीमा सड़क संगठन से तकनीकी सहयोग मांगा है। रक्षा मंत्री ने हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है।
गौरतलब है कि वर्ष 2001 में उद्घाटित यह सेतु भागलपुर और उत्तर बिहार के बीच आवागमन की जीवनरेखा माना जाता है। मरम्मत कार्य की समयबद्ध पूर्णता और समानांतर पुल के शीघ्र संचालन पर अब क्षेत्रवासियों की निगाहें टिकी हैं।



