उठे स्वप्न छोड़ दी नाव समंदर में बस उड़ानें पाने के लिए

उठे स्वप्न छोड़ दी नाव समंदर में बस उड़ानें पाने के लिएखोज ली डूबके मोती समंदर से थाह ली जमाने…

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मन किसी अज्ञात पीड़ा

मन किसी अज्ञात पीड़ामें चेतनाशून्य हो गया थामन का अंधकार रात्रिके उस गहनअंधकार में छटपटा रहा थाउस सूर्योदय कीप्रतीक्षा मेंअपार…

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निश्छल स्त्री और प्रेम

पुरुषों को प्रेम के लिएहमेशा जतन करने पड़ेउसने युद्ध तोबहुत सारे जीतेपर स्त्री का मनकभी जीत नहीं पाया श्रेष्ठता प्राप्त…

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