साहित्य
ओ रामजी, बड़ा दुःख दी ना
ओ रामजी, बड़ा दुःख दी ना तेरे इस कोरोना ने, बड़ा दुःख दी ना तेरे कोरोना ने, बड़ा दुःख दी…
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मेरा सपना
सपने देखना अच्छी बात है,पर सपने खुली आँखों से देखिए। उन सपनों में आपका विश्वास भी होना चाहिये और पूरा…
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बेटी बन जो आई मैं इस दुनिया में
बेटी बन जो आई मैं इस दुनिया मेंऐसा लगा पराई हूं मैं अपने ही घर में।सबने नाक और मुंह क्या…
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बीत गया है बुरा जमाना
बीत गया है बुरा जमाना ,जब नारी शोषित होती थी ,ढोल,गंवार ,शुद्र ,पशु जैसी ,नारी प्रताड़ित होती थी ।कहलाती थी…
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सावन में सोलह सिंगार पिया का इंतजार
लघु कथा अरे ऋतू दी !आप अभी तक तैयार नहीं हुई,चलिए न जल्दी से तैयार हो जाइयेमंदिर चलना है ,और…
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पायल में समन्वय-मंत्र
पायल की रुनझुन में, युग-मर्यादाके लिए मां सीता की स्वीकार्यता है. पायल की छम-छम में, कृष्ण-भक्तिभावयज्ञ की राधा-नाम चरितार्थता है.…
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अंगूर खट्टे हैं, “औकात” से बाहर भी: एक सत्य घटना
लेखक: डॉ सत्यप्रकाश आज अपने पास की एक हॉट में जाना हुआ, धर्मपत्नी जी के साथ सुबह सुबह… मेरी दिनचर्या…
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कभी धूप कभी छाँव
सुख दुःख है जीवन में ऐसे,जैसे होते धूप और छाँव।कभी मिलती मरहम ख़ुशियों की,तो कभी ग़मों के मिलते घाव।पर न…
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मोहभंग
बड़ी तेजी से उस के कदम घर की तरफ बढ़ रहेथे ।फिल्म ‘रघुवंशम्’देख कर घर लौट रहा था अमन।बहुत खुश…
Read More » कौन है जो कातिल बनाने में लगा है
कौन है जो कातिल बनाने में लगा हैकौन है जो मुझे आजमाने में लगा है। वक्त का रेत फिसलते चला…
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