मुक्तक

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जगत दीवाना चाम का और दाम का।

कोई दीवाना पद प्रतिष्ठा नाम का।

हर कोई दुनिया में दीवाना दिखता।

कोई विरला यहाँ दीवाना राम का।

प्यारेलाल साहू मरौद छ.ग.

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