गंगा कटाव स्थल का GFCC-CWC टीम ने किया निरीक्षण, राघोपुर और विक्रमशिला पुल के संपर्क पथ पर बढ़ा खतरा

नवगछिया। गंगा नदी की बदलती धारा के कारण खैरपुर राघोपुर गांव और विक्रमशिला सेतु के संपर्क पथ पर कटाव का खतरा बढ़ गया है। संभावित खतरे को देखते हुए गुरुवार को गंगा फ्लड कंट्रोल कमेटी (GFCC), केंद्रीय जल आयोग (CWC) और जल संसाधन विभाग के अभियंताओं की संयुक्त टीम ने खैरपुर राघोपुर स्थित जमींदारी बांध और कटाव प्रभावित स्थलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण का उद्देश्य बाढ़ का पानी घटने के बाद समय पर कटाव निरोधी कार्य शुरू करने के लिए आवश्यक तैयारियों और तकनीकी पहलुओं का आकलन करना था।

गोपालपुर के विधायक सह ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल की पहल पर हुई इस कवायद के दौरान अधिकारियों ने गंगा की वर्तमान धारा, नदी की गहराई, चौड़ाई और कटाव की स्थिति की जानकारी ली। टीम ने आगामी कटाव निरोधी कार्यों की रूपरेखा तैयार करने के लिए स्थल का जायजा लिया।
निरीक्षण में CWC के मुख्य अभियंता अजय कुमार, GFCC के निदेशक, जल संसाधन विभाग के मॉनिटरिंग एसीई गौरव कुमार, विभागीय सलाहकार समिति के सदस्य मनोज रमण, कटिहार के मुख्य अभियंता जयप्रकाश पासवान, अधीक्षण अभियंता सुबोध चौधरी तथा नवगछिया बाढ़ नियंत्रण कार्यालय के कार्यपालक अभियंता गौतम कुमार सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे।
ढाई से तीन किलोमीटर तक कटाव से प्रभावित हुआ जमींदारी बांध
अभियंताओं के अनुसार, विक्रमशिला सेतु के डाउनस्ट्रीम में स्थित खैरपुर राघोपुर जमींदारी बांध का करीब ढाई से तीन किलोमीटर हिस्सा इस बाढ़ के दौरान कटाव से प्रभावित होकर ध्वस्त हो गया है। गंगा की धारा का रुख पूर्व-पश्चिम के बजाय उत्तर-दक्षिण दिशा में बदलने से इलाके में कटाव की समस्या बढ़ी है।
अधिकारियों ने कटाव प्रभावित क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और नदी की पूर्ववर्ती स्थिति की जानकारी ली। समय पर कटाव निरोधी कार्य कराकर राघोपुर गांव, खैरपुर क्षेत्र और तटबंध को सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया।
CWC के मुख्य अभियंता अजय कुमार ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि टीम ने नदी की गहराई, चौड़ाई और बहाव की स्थिति का आकलन किया है। नदी की ट्रेंडिंग और तकनीकी अध्ययन के माध्यम से आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि आगे की कार्रवाई के लिए उपयुक्त योजना तैयार की जा सके।
गंगा में गाद जमा होने से घट रही नदी की चौड़ाई
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गंगा में लगातार गाद जमा होने के कारण नदी की चौड़ाई सिमट रही है। इससे नदी की धारा का दबाव बढ़ रहा है और तटीय इलाकों में कटाव का खतरा गंभीर होता जा रहा है। ग्रामीणों की आशंका है कि यदि नदी की धारा का रुख इसी तरह बना रहा, तो राघोपुर गांव के साथ आसपास के तटीय क्षेत्रों और विक्रमशिला सेतु के संपर्क पथ पर भी खतरा बढ़ सकता है।
ग्रामीणों ने संबंधित विभागों से केंद्रीय जल आयोग की तकनीकी सलाह के आधार पर नदी की धारा का वैज्ञानिक अध्ययन कराने, गाद की समस्या का आकलन करने और स्थायी कटाव निरोधी कार्य कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि केवल अस्थायी उपायों से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसलिए नदी की बदलती धारा और कटाव की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए समय रहते ठोस कदम उठाना जरूरी है, ताकि गांव, तटबंध और महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।



