कविता काननसाहित्य

मां

 

जीवन में इतनी भगवान से माँगों कि माँ बिना कोई घर न हो, कोई माँ बिना बेघर न हो।

मरने के लिए हजारों रास्ते है, लेकिन जन्म होने के लिए एक ही रास्ते हैं वह माँ।
तुम्हें पता है, प्रेम अंधा क्यों होते ? क्योंकि… माँ तुम पैदा होने से पहले ही प्रेम करने शुरू की।

मां का गोदमे जो आनन्द ,वह हंसी में जो खुशी झलकती,इसकी आगे स्वर्ग भी फिका लागती ।

माँ चाहे पढ़े -लिखे हो या अनपढ़, लेकिन संसार के सबसे बहुमूल्य ग्यान माँ द्वारा प्राप्त होते हैं ।

मैं रातभर स्वर्ग के आनन्द उठाते रहे, लेकिन जब नींद खुला तब पता चला कि मैं… माँ का गोद में सोया हूँ।
ऊँपर जिसके अन्त होते नहीं उसे प्रमात्मा कहलाते,नीचे जिसके अन्त नहीं उसे माँ कहते।

हजारों दिया चाहिए एक आरती सजाने लिए और अरबों बूँद चाहिए एक समुद्र बनने, लेकिन एक माँ सिर्फ काफी हमारे जीवन में खुशियाँ भरने लिए ।
हर सम्बन्ध बनावटी से स्वार्थ, गुस्सा, राग, बदला व धोखा दाड़ी से देखा, लेकिन वर्षों से देख रहा हूँ मेरी मां न तो प्रेम बनावटी पाया न कोई कमी पाई।
आज रातभर मेरे माँ सोया नहीं, क्योंकि मैंने बस इतनी कहा कि माँ मुझे डर लाग रहा हैं।

माँ सबकी जगह ले सकती हैं, लेकिन एक माँ के जगह कोई भी नही ले सकती।

तुम्हारे लिए ये दुनियाँ तक छोड़ दूंगा , लेकिन उसे मैं क्या जवाब दूं जो हर दिन दरवाजे में खड़े होकर कहती हैं कि बेटा आज घर जल्दी आ जाना ।
मैं मां के गोद में सिर रखकर पुछा माँ मुझे कब तक ऐसी अपनी गोद मे सोने दोगी ? माँ बोली बेटा जब तक तुम अपने काँध में मुझे नहीं उठाऊंगी तब तक ।
नाम– रंजीत सैबो
पता –पश्चिम बंगाल (बनारहट चाय बागान)

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