स्कूली पाठ्यक्रम में श्रीमद्भगवद्गीता के समावेशन पर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया

IMG 20260327 WA0000

भागलपुर माननीय सांसद श्री अजय कुमार मंडल द्वारा कक्षा 6 से 10 तक के स्कूली पाठ्यक्रम में श्रीमद्भगवद्गीता के 18 अध्यायों के 700 श्लोकों को अनिवार्य रूप से शामिल किए जाने संबंधी सुझाव पर केंद्र सरकार की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है।

केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री  द्वारा दिनांक 20 मार्च 2026 को भेजे गए पत्र में अवगत कराया गया है कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने इस विषय की समीक्षा की है। समीक्षा में पाया गया कि श्रीमद्भगवद्गीता के अनेक श्लोक पहले से ही विभिन्न कक्षाओं की भाषा पाठ्यपुस्तकों में सम्मिलित हैं।

पत्र के अनुसार, कक्षा 8, 11 एवं 12 की विभिन्न पुस्तकों—जैसे ‘दीपकम्’, ‘शाश्वती’ एवं ‘भास्वति’—में गीता के शिक्षाप्रद अंशों को शामिल किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों, कर्तव्यबोध एवं जीवन-दर्शन की समझ विकसित करने में सहायता मिलती है।

माननीय सांसद श्री अजय कुमार मंडल ने केंद्र सरकार द्वारा उनके सुझाव पर विचार करने और सकारात्मक पहल करने के लिए आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता भारतीय संस्कृति एवं जीवन मूल्यों का महत्वपूर्ण स्रोत है और इसे शिक्षा प्रणाली में उचित स्थान मिलना विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है।

उन्होंने यह भी आशा व्यक्त की कि भविष्य में इस दिशा में और व्यापक कदम उठाए जाएंगे, जिससे नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा से गहराई से जोड़ने में मदद मिलेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *