कविता कानन
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गुम हो जाता हूँ
तुझे याद ऱखकर मैं सब भूल जाता हूँ।अपने ही अंदर कही गुम हो जता हूँ। जब तुम मेरी कविताएँ पढ़ती…
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चेहरा बदल रहा है
आसमां रो रहा हैआंसू समंदर बना रहा हैसूर्य ताप से झुलस पानीवाष्पित हो बादल बना हैघनघोर घटा छलक छलकअवनि अम्बर…
Read More » संघर्ष
उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष व महामंत्री क्रमशः श्री आलोक तिवारी जी व डा. योगेश्वर शुक्ल तथा…
Read More »दिसम्बर जा रहा है
दिसम्बर जा रहा है जैसे फूलों से खुशबू जा रही है।ठीक वैसे ही दिसम्बर जा रहा है। कोई हमें पाग़ल…
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रघुवीर सहाय के जन्मदिन के अवसर पर काव्यगोष्ठी का आयोजन
कविता-कानन साहित्य कला मंच के द्वारा 09/12/2021को समकालीन हिन्दी कविता के महत्वपूर्ण स्तंभ रघुवीर सहाय के जन्मदिन के अवसर पर…
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चक्रवर्ती राजगोपालाचारी
चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (तमिल: சக்ரவர்தி ராஜகோபாலாச்சாரி) (दिसम्बर १०, १८७८ – दिसम्बर २५, १९७२) भारत के वकील, लेखक, राजनीतिज्ञ और दार्शनिक थे।…
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कोटि नमन हो उन चरणों में(श्रधांजलि)
कोटि नमन हो उन चरणों मेंदेश के हित जो पग चलेऐसा ना कोई पुष्प जगत मेंजो इनका पद वंदन करें।सदा…
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नशा मुक्त हो सारा जहां!
नशा मुक्त हो सारा जहां!नशा नाश का कारण, अहित सदा ही करता हैं,धन, दौलत,इज्जत सबकुछ माटी मोल कर देता हैं।परिवार…
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मन
रे मन तू चंचल घोड़ासरपट दौड़ लगाता हैलगाम धरी नहीं कसकेत्राहि त्राहि मचाने वालीजीवन की जो हरियालीपैरों तले कुचल डालीबेभट…
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