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नए आपराधिक कानूनों को 100% लागू करने का लक्ष्य, अमित शाह ने दी एक साल की समय-सीमा

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश में तीन नए आपराधिक कानूनों को पूरी तरह लागू करने के लिए एक साल की समय-सीमा तय की है। उन्होंने कहा कि नए कानूनों के 100 प्रतिशत क्रियान्वयन के बाद आपराधिक मामलों का निपटारा सुप्रीम कोर्ट तक तीन साल के भीतर सुनिश्चित करने का लक्ष्य है। साथ ही दोषसिद्धि दर में 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की उम्मीद जताई गई है।

अमित शाह ने इंटेलिजेंस ब्यूरो द्वारा आयोजित दो दिवसीय नौवें नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी (NSS) कॉन्फ्रेंस-2026 के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि देश को आने वाले 15 से 20 वर्षों की सुरक्षा चुनौतियों का पहले से अनुमान लगाना होगा। उन्होंने कहा कि संभावित खतरों को गंभीर संकट बनने से पहले ही रोकने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करना जरूरी है।

गृह मंत्री ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) को अगले एक वर्ष के भीतर पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। ये तीनों नए कानून 1 जुलाई 2024 से लागू हैं और इन्होंने क्रमशः भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली है।

शाह ने बताया कि CCTNS, ICJS, NATGRID और NAFIS जैसे महत्वपूर्ण सिस्टम को जोड़कर एकीकृत डेटा बैंक तैयार किया गया है। उन्होंने युवा अधिकारियों से डेटा इंटीग्रेशन, डेटा एनालिसिस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बेहतर उपयोग करते हुए ऐसी खुफिया और उपयोगी जानकारी विकसित करने की अपील की, जिस पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और पूर्वोत्तर में उग्रवाद जैसे आंतरिक सुरक्षा के बड़े हॉटस्पॉट पर प्रभावी कार्रवाई की गई है। उन्होंने इसके लिए राज्य पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के बीच बेहतर समन्वय को महत्वपूर्ण बताया।

अमित शाह ने कहा कि यदि नशीले पदार्थों, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर से जुड़ी समस्याओं को पहले ही पहचानकर प्रभावी कदम उठाए गए होते, तो देश को लंबे समय तक इन चुनौतियों का सामना नहीं करना पड़ता।

उन्होंने PFI पर प्रतिबंध और उसके नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण बताया। साथ ही सीमा से सटे राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए व्यापक रणनीति पर भी जोर दिया।

गृह मंत्री ने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए भविष्य की चुनौतियों को पहले से समझना और उन्हें बड़ा खतरा बनने से रोकना अब सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

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