बिहार

Raghopur Embankment News: नवगछिया में तटबंध पर मंडराया खतरा, कई जगह कटाव; 300 मजदूरों ने संभाला मोर्चा

नवगछिया। राघोपुर क्षेत्र में गंगा नदी का तेज बहाव और बदलती धारा तटबंध के लिए लगातार चुनौती बनी हुई है। राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध के एक हिस्से के क्षतिग्रस्त होने के बाद अब आगे कई स्थानों पर भी तेजी से कटाव होने लगा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने युद्धस्तर पर कटावरोधी और मरम्मत कार्य शुरू कर दिया है। मौके पर करीब 300 मजदूरों को अलग-अलग हिस्सों में लगाया गया है।

बताया जा रहा है कि मंगलवार तड़के करीब 3 बजे तटबंध का एक हिस्सा टूट गया था, जिसके बाद बाढ़ का पानी आबादी वाले क्षेत्रों में फैल गया। ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल के आवास सहित आसपास के सैकड़ों घरों में पानी प्रवेश कर गया। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिससे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

तटबंध के क्षतिग्रस्त हिस्से को बंद करने का काम लगातार जारी है, लेकिन विभाग के सामने नई चुनौती अन्य स्थानों पर बढ़ता कटाव है। गंगा की तेज धारा तटबंध की मिट्टी को लगातार काट रही है। कई जगहों पर मिट्टी दरकने और तटबंध कमजोर होने की सूचना है।

कटाव रोकने के लिए मजदूर बालू भरे बोरे, हाथी पांव, बांस और पेड़ों का सहारा लेकर नदी की तेज धारा के दबाव को कम करने का प्रयास कर रहे हैं। विभाग ने संभावित कटाव वाले स्थानों को चिन्हित कर वहां विशेष निगरानी शुरू कर दी है।

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि समय रहते तटबंध की मजबूती के लिए स्थायी कार्य नहीं किया गया। ग्रामीण आशीष यादव ने कहा कि पानी आने के बाद ही काम शुरू किया जाता है, जबकि तटबंध को मजबूत करने का कार्य सूखे के दिनों में ही किया जाना चाहिए। वहीं ग्रामीण रुपेश कुमार के अनुसार, कटाव लगातार जारी है और गंगा की धारा राघोपुर की ओर मुड़ने से स्थिति गंभीर बनी हुई है। उन्होंने दावा किया कि करीब 40 मीटर तक कटाव हो चुका है और लगभग 1500 घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है।

इधर, गंगा का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। यहां गंगा करीब 33.95 मीटर पर बह रही है, जबकि खतरे का निशान 33.68 मीटर है। बढ़े जलस्तर और तेज बहाव के कारण राघोपुर समेत आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है।

जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता सुबोध चौधरी ने बताया कि विभाग की टीम पिछले दो-तीन दिनों से लगातार कटावरोधी कार्य में जुटी है। उनके अनुसार, मंगलवार सुबह कट एंड के डाउनस्ट्रीम हिस्से में करीब 15 से 20 मीटर तक कटाव दिखाई देने के बाद तत्काल मजदूरों और संसाधनों को लगाया गया।

उन्होंने बताया कि घास काटकर डालने के साथ बांस के रोल तैयार कर कटाव वाले हिस्से को स्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है। गंगा की धारा बदलकर लगभग 90 डिग्री के कोण पर तटबंध से टकरा रही है, जिससे तेज करंट और बैक रोल का दबाव सीधे तटबंध व अप्रन पर पड़ रहा है।

विभाग के अनुसार, करीब चार लाख बोरे कटावरोधी कार्य के लिए उपलब्ध रखे गए हैं और उन्हें लगातार भरकर जरूरत वाले स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। अभियंता, विभागीय कर्मचारी और मजदूर अलग-अलग रीच में 24 घंटे निगरानी और बचाव कार्य में जुटे हैं।

रेलवे टैग और महादेवपुर घाट के आसपास भी टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि नदी की धारा का दबाव बढ़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। विभाग का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।

हालांकि फरक्का बराज के सभी फाटक खोले जाने के बाद आने वाले दिनों में गंगा के जलस्तर में कमी की संभावना जताई जा रही है। लेकिन जब तक जलस्तर और नदी की तेज धारा का दबाव कम नहीं होता, तब तक राघोपुर तटबंध पर खतरा पूरी तरह टला हुआ नहीं माना जा सकता। फिलहाल प्रभावित लोगों की नजर तटबंध मरम्मत और कटावरोधी कार्य की सफलता पर टिकी हुई है।

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