नवगछिया पुलिस जिला के झंडापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत दयालापुर के पास NH-31 सोमवार को खून से लाल हो गया। तेज रफ्तार की रौ में दौड़ती एक बस और दो छोटे वाहनों के बीच ऐसी भीषण टक्कर हुई कि चार लोगों की मौके पर ही जिंदगी थम गई, जबकि 11 लोग घायल होकर जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक टक्कर इतनी जोरदार थी कि वाहनों के परखच्चे उड़ गए। चीख-पुकार, भगदड़ और खून से सना हाईवे—कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका मातम में बदल गया।

प्रशासन हरकत में
घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन सक्रिय हो गया।
नवगछिया के जिलाधिकारी और नवगछिया के एसपी स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
जिलाधिकारी ने चार मौतों की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि दो मृतकों की पहचान हो चुकी है, जबकि दो की पहचान अब तक नहीं हो पाई है। 11 घायल व्यक्तियों में से कुछ की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है।
गंभीर रूप से घायलों को बेहतर इलाज के लिए भागलपुर के प्रसिद्ध मायागंज अस्पताल रेफर किया गया है, जहां विशेष चिकित्सा व्यवस्था की गई है।
तेज रफ्तार बनी काल
प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार को हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है। एसपी ने स्पष्ट किया कि विस्तृत जांच के बाद ही दुर्घटना की असली वजह सामने आएगी।
जिलाधिकारी ने स्वीकार किया कि NH-31 पर यातायात का अत्यधिक दबाव है। सड़क के चौड़ीकरण की योजना पर चर्चा हो चुकी है और जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
आखिर कब थमेगा हादसों का सिलसिला?
NH-31 अब सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि लगातार हो रही दुर्घटनाओं की गवाह बनती जा रही है। सवाल यह है कि—
क्या तेज रफ्तार पर लगाम लगेगी?
क्या ओवरलोड और लापरवाह ड्राइविंग पर सख्ती होगी?
क्या चौड़ीकरण और ट्रैफिक प्रबंधन समय रहते हो पाएगा?
चार घरों के चूल्हे हमेशा के लिए बुझ गए…
ग्यारह परिवार अस्पताल की दहलीज पर दुआ मांग रहे हैं…
हाईवे पर भागती रफ्तार ने फिर साबित कर दिया —
लापरवाही की एक झलक, जिंदगी भर का अंधेरा बन सकती है।

