पटना

विक्रमशिला सेतु से शीघ्र यातायात बहाली हेतु युद्धस्तर पर तैयारी, सचिव ने BRO और IIT की टीम के साथ की उच्चस्तरीय समीक्षा

विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने से उत्पन्न स्थिति और यातायात को पुनः सुचारू रूप से बहाल करने के उद्देश्य से आज पथ निर्माण विभाग के सभागार में एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। पथ निर्माण विभाग के सचिव श्री पंकज कुमार पाल की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में विक्रमशिला सेतु की जांच, स्ट्रक्चर की स्तिथि, क्षतिग्रस्त हिस्सा की मरम्मती करते हुए सेतु से शीघ्र यातायात बहाल करने सहित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गहन चर्चा की गई।

उक्त बैठक में बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) की टीम, आईआईटी पटना की टीम, पुल तकनीकी विशेषज्ञ श्री आलोक भौमिक एवं विभाग के वरीय पदाधिकारियों सहित अन्य लोग मौजूद रहें।

बैठक की शुरुआत में सचिव श्री पंकज कुमार पाल ने विक्रमशिला सेतु के एक स्पैन से उत्पन्न समस्याओं, वैकल्पिक यातायात व्यवस्था, समस्याओं के निराकरण हेतु की जा रही कार्रवाई के संबंध में विस्तृत जानकारी ली। प्रस्तुतीकरण के माध्यम से सचिव महोदय को क्षतिग्रस्त हिस्से के मेंटेनेंस करने, डिजाईन, टाइमलाइन, यातायात को सेतु से बहाल करने की जानकारी दी गई।
बेली ब्रिज एवं ट्रस ब्रिज बनाने जैसे महत्वपूर्ण उपायों पर चर्चा की गई ताकि तत्काल रूप से विक्रमशिला सेतु से यातायात पुनर्स्थापन हो सके।

लोगों को हो रही असुविधा को देखते हुए बैठक में तकनीकी विशेषज्ञों और अधिकारियों ने सेतु की मरम्मत हेतु एक्शन प्लान तैयार किया। बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) की सहायता से शीघ्र ही एक बेली ब्रिज का निर्माण किया जाएगा। तकनीकी विशेषज्ञों के साथ मिलकर युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है। सचिव ने बताया कि इसका उद्देश्य आंशिक रूप से यातायात को तुरंत बहाल करना है ताकि जनता को हो रही असुविधा कम हो सके। उन्होंने कहा कि विक्रमशिला सेतु भागलपुर एवं आसपास के जिलों के लोगों के लिए लाइफलाइन है इसलिए बेली ब्रिज का निर्माण कर आंशिक रूप से यातायात शुरू किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि बेली ब्रिज के साथ-साथ ट्रस ब्रिज का निर्माण कार्य भी समानांतर रूप से चलेगा। इसे 2 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह ब्रिज दो लेन का होगा और इसमें पैदल यात्रियों के लिए अलग से व्यवस्था होगी।

सचिव ने कहा कि आईआईटी पटना की टीम के द्वारा पूरे विक्रमशिला सेतु का सेफ्टी ऑडिट की जा रही है। इसकी रिपोर्ट 3 सप्ताह में आने की उम्मीद है, जिसके आधार पर सेतु की भविष्य की मरम्मत और मजबूती पर निर्णय लिया जाएगा।

सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सेतु की मरम्मत और यातायात बहाली के कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने मुख्य अभियंता एवं अन्य टीमों को स्थल पर लगातार कैम्प करने का निदेश दिया।

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