पत्रकार आनंद कौशल की पहली ग़ज़ल पुस्तक ‘हमनशीं’ बनी चर्चा का विषय, संवेदनाओं से भरी कृति को मिली सराहना

Hamnasheen
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पटना। वरिष्ठ पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार एवं वेब जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (WJAI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आनंद कौशल की पहली ग़ज़ल संग्रह पुस्तक ‘हमनशीं’ साहित्य और पत्रकारिता जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है। बिहार के वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म सेंसर बोर्ड की एडवाइजरी कमेटी के पूर्व सदस्य अनूप नारायण सिंह ने पुस्तक की विस्तृत समीक्षा करते हुए इसे पत्रकारिता और साहित्य के दुर्लभ संगम का सशक्त उदाहरण बताया है।

समीक्षा में कहा गया है कि वर्षों तक टेलीविजन पत्रकारिता में सक्रिय रहने वाले आनंद कौशल ने खबरों की दुनिया से आगे बढ़कर अपनी संवेदनाओं, अनुभवों और जीवन के अनकहे पहलुओं को ग़ज़लों के माध्यम से अभिव्यक्त किया है। ईटीवी बिहार, हमार टीवी सहित विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समाचार चैनलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने वाले आनंद कौशल ने पत्रकारिता को जनसरोकारों का माध्यम बनाया, वहीं अपने भीतर के कवि को भी जीवित रखा। उसी संवेदनशीलता का परिणाम ‘हमनशीं’ है।

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समीक्षा के अनुसार यह पुस्तक केवल ग़ज़लों का संग्रह नहीं, बल्कि प्रेम, विरह, अकेलेपन, रिश्तों, समय की विडंबनाओं और मानवीय संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज़ है। संग्रह की ग़ज़लें पाठकों को केवल शब्दों से नहीं, बल्कि भावनाओं से जोड़ती हैं। पुस्तक की शुरुआती पंक्तियां ही पाठकों को भावनात्मक रूप से अपनी ओर आकर्षित करती हैं और पूरी पुस्तक में यही आत्मीयता बनी रहती है।

समीक्षक का मानना है कि ‘हमनशीं’ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सहजता और ईमानदार अभिव्यक्ति है। आनंद कौशल अपनी शायरी में दर्द को निराशा नहीं बनने देते। उनकी ग़ज़लों में तन्हाई है, लेकिन टूटन नहीं; प्रेम है, लेकिन शिकायतों का शोर नहीं; और उम्मीद है, लेकिन कृत्रिम आशावाद नहीं। यही संतुलन इस संग्रह को विशेष बनाता है।

भाषा की दृष्टि से भी पुस्तक को सराहा गया है। इसमें हिंदी की सहजता और उर्दू की नज़ाकत का संतुलित प्रयोग किया गया है, जिससे साहित्य के गंभीर पाठकों के साथ-साथ आम पाठक भी आसानी से जुड़ सकते हैं।

समीक्षा में यह भी कहा गया है कि सोशल मीडिया के दौर में, जहां शायरी अक्सर त्वरित लोकप्रियता का माध्यम बनती जा रही है, वहीं ‘हमनशीं’ अनुभव, संवेदना और आत्ममंथन से जन्मी एक गंभीर साहित्यिक कृति के रूप में सामने आती है। आनंद कौशल ने अपनी पहली ही पुस्तक से यह संकेत दिया है कि उनकी साहित्यिक यात्रा लंबे समय तक प्रभाव छोड़ने वाली होगी।

वरिष्ठ पत्रकार अनूप नारायण सिंह ने अपनी समीक्षा में निष्कर्ष दिया है कि ‘हमनशीं’ केवल पढ़ने की नहीं, बल्कि महसूस करने की पुस्तक है। यह पाठकों को अपने भीतर झांकने, बीते समय से संवाद करने और संवेदनाओं को नए सिरे से पहचानने का अवसर देती है। यही किसी भी सफल साहित्यिक कृति की सबसे बड़ी पहचान होती है।

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