साहित्यकविता कानन

पैसे मिल गए

भाग 3

तीनो भाग कर जाते और देखते की ये तो राघव की मां है।राहुल राघव की मां के पास जाता है और बोलता आंटी क्या हुआ बाहर किसने निकाला आपको और डॉक्टर कहा गए सुनील डॉक्टर को आवाज़ लगाता है तभी नर्स आती और बोलती सर इनका जितना पैसा जमा था उससे अधिक इलाज़ कर दिया अब जब तक पैसे जमा नही होगे इलाज नहीं होगा यह बोल कर नर्स जाने लगती पीछे से नेहा आवाज़ देती रुको, आप इलाज शुरू करे सारा पैसा राज कम्पनी देगी जल्दी से डॉक्टर को बुलाओ।यह बात सुन कर राहुल गुस्से से लाल हो जाता नेहा का हाथ पकड़ कर पार्किंग में ले आता और चिल्ला कर बोलता किसने बोला था तुम्हें उस राज कम्पनी का नाम बोलने को नेहा प्यार से बोलती राहुल शांत हो जाओ सब देख रहे है क्या कार में बैठ कर बात करें या घर चल कर राहुल फिर गुस्से में बोलता हमे कही नहीं करना बात और यही बात करना है।तुम ये बताओ राज कम्पनी का नाम क्यों लिया क्या जरूर थी उस पागल की कम्पनी में जॉब करने की एक बार हमसे पूछ लेती क्या हम तुम्हें जॉब नहीं देते?तभी सुनील आता और बोलता राघव की मां का इलाज शुरू हो गया और नेहा ने सही किया राज कम्पनी का नाम लिखवा दिया अभी तक कम्पनी में किसी को पता नहीं की राघव को निकाल दिया नाईट में मैनेजर से लड़ाई हुई और सुबह ये सब? नेहा बोलती क्या बोल रहे हो सुनील तुम होश में तो हो राघव हमारी कम्पनी का हीरो है। राहुल बोलता हीरो है पर इसकी सारी सैलरी काट ली है और नौकरी से निकाल दिया।नेहा बोलती इतनी बड़ी बात हो गई, ये राज ऐसे कैसा कर सकता अभी जाति हूं और बोलती हु उसको,नेहा जैसे ही आगे बढ़ती सुनील रोक लेता और बोलता सच में बुरा या तुम भी राज की तरह यहां भर्ती कराया और लापता हो जाओगी?ये भी ऐसा ही करेगी,इसको क्या फर्क पड़ता है।राहुल गुस्से में बोलता है।तुम दोनो को जो समझना है समझो पर राज ऐसा नहीं है इस बात का तुम्हें सबूत भी देगे ,यह बोलते हुऐ नेहा आगे बड़ जाती है।राहुल फिर हाथ पकड़ कर पीछे खींच लेता है कुछ धीरे से काम करने को देता और बोलता यदि तुम हमें अपना दोस्त समझती तो ये कर देना पर राज या किसी को कोई बात पता न चले,राज केसा है अब तुम अपनी आखों से देख लेना।

शेष भाग 4 में
प्रतिभा जैन
टीकमगढ़ मध्यप्रदेश

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