नवगछिया : नवगछिया अनुमंडल में खेल सुविधाओं के विकास को लेकर वर्ष 2020 से 2025 के बीच स्वीकृत करोड़ों रुपये की योजनाओं की वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद विकास कार्यों पर सवाल उठने लगे हैं। सहयोग पोर्टल के माध्यम से मांगी गई जवाब में जिला खेल पदाधिकारी, भागलपुर द्वारा उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट से पता चला है कि स्वीकृत चार प्रमुख खेल मैदान परियोजनाओं में केवल एक का निर्माण पूरा हो सका है, जबकि तीन परियोजनाएं अब भी विभिन्न कारणों से अधूरी हैं।
रिपोर्ट के अनुसार गोपालपुर प्रखंड स्थित उच्च विद्यालय सैदपुर खेल मैदान का निर्माण लगभग 120.71 लाख रुपये की लागत से पूरा हो चुका है। यह अनुमंडल की एकमात्र परियोजना है, जिसका कार्य पूर्ण हो गया है।
वहीं खरीक प्रखंड के आदर्श उच्च विद्यालय तुलसीपुर खेल मैदान पर करीब 22.69 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्य अभी तक केवल 65 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है।
सबसे अधिक चिंता की बात तीन बड़ी परियोजनाओं को लेकर सामने आई है। रंगरा चौक खेल मैदान की लगभग 203.53 लाख रुपये की स्वीकृत परियोजना स्थल परिवर्तन की प्रक्रिया में अटकी हुई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि स्थानीय विधायक के अनुरोध पर परियोजना का स्थान बदले जाने की कार्रवाई चल रही है।

इसी तरह इस्माइलपुर प्रखंड के परवत्ता खेल मैदान के लिए लगभग 219.08 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे, लेकिन भूमि विवाद के कारण निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है। अंचल कार्यालय से भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी बताई गई है।
नारायणपुर प्रखंड के पहाड़पुर खेल मैदान की लगभग 205.92 लाख रुपये की परियोजना भी प्रारंभिक प्रक्रिया से आगे नहीं बढ़ सकी है। यहां अब तक सीमांकन और कार्य आवंटन की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो पाई है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए खेल सामग्री वितरण मद में कोई राशि खर्च नहीं की गई, जबकि अनुमंडल के 55 खेल एवं ओपन जिम स्थलों के अधिष्ठापन पर 34.74 लाख रुपये व्यय किए गए हैं।
करोड़ों रुपये की स्वीकृति के बावजूद वर्षों से अधिकांश परियोजनाओं का अधूरा रहना स्थानीय खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के बीच चिंता का विषय बना हुआ है। हालांकि रिपोर्ट में देरी के पीछे भूमि उपलब्धता, स्थल परिवर्तन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को प्रमुख कारण बताया गया है, लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि इन बाधाओं का समय रहते समाधान क्यों नहीं किया गया। स्थानीय लोगों का मानना है कि खेल मैदानों के अभाव में ग्रामीण प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिससे खेल विकास की योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है।





