भागलपुर

2023 में ही दर्ज थी खतरे की घंटी, फिर क्यों टूटा राघोपुर का तटबंध ? अर्पणा कुमारी ने उठाए सवाल

खरीक। राघोपुर कटाव प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर प्रभावित ग्रामीणों की स्थिति का जायजा लेने पहुंचीं बिहपुर विधानसभा की पूर्व प्रत्याशी अर्पणा कुमारी ने सरकारी दस्तावेजों में दर्ज पुराने निरीक्षण और पत्राचार का हवाला देते हुए राघोपुर-विक्रमशिला सेतु क्षेत्र में स्थायी कटावरोधी उपायों में देरी पर सवाल उठाए हैं।

अर्पणा कुमारी के अनुसार, 6 फरवरी 2023 की विभागीय निरीक्षण कार्यवाही में विक्रमशिला सेतु के निकट गंगा नदी के उत्तर दिशा में बढ़ते प्रवाह को देखते हुए Guide Bund और River Training Work की आवश्यकता का उल्लेख किया गया था। उनका कहना है कि इसके बाद भी इस दिशा में विभागीय स्तर पर निरीक्षण और पत्राचार का सिलसिला चलता रहा।

उन्होंने बताया कि 18 नवंबर 2025 को राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर की ओर से पूर्व मध्य रेलवे, सोनपुर को भेजे गए पत्र में 2023 की निरीक्षण कार्यवाही का हवाला देते हुए गंगा के उत्तरी तट पर पुल के upstream और downstream क्षेत्र में Guide Bund निर्माण का अनुरोध किया गया था।

इसके अलावा, अर्पणा कुमारी के मुताबिक 7 नवंबर 2025 को रेलवे और संबंधित विभागों की संयुक्त टीम ने निरीक्षण किया, जबकि 9 जनवरी 2026 को पूर्व मध्य रेलवे, सोनपुर के मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय से राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर को पत्र भेजकर Guide Bund निर्माण के लिए MoRTH से प्राप्त सहमति/स्वीकृति रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया था।

अगस्त में बिगड़े हालात

अर्पणा कुमारी ने कहा कि इन निरीक्षणों और पत्राचार के बावजूद अगस्त 2026 में राघोपुर क्षेत्र में गंभीर कटाव और तटबंध टूटने की स्थिति सामने आई। उनके अनुसार, 24 अगस्त की रात तटबंध टूटने के बाद बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए और लोगों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि उनका सवाल किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि विभागीय प्रक्रिया और समयबद्ध कार्रवाई से जुड़ा है। उनका कहना है कि जब सुरक्षा उपायों की जरूरत पहले ही सरकारी रिकॉर्ड में सामने आ चुकी थी, तो प्रस्तावित कार्यों की स्वीकृति और क्रियान्वयन की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।

बाढ़ के बाद भी बनी हुई हैं चुनौतियां

कटाव प्रभावित क्षेत्र का जायजा लेने के दौरान अर्पणा कुमारी ने ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि पानी कम होने के बावजूद क्षेत्र में कीचड़, गंदगी, दुर्गंध और संक्रमण का खतरा बना हुआ है।

उन्होंने सामुदायिक रसोई का भी निरीक्षण किया। उनके अनुसार, वहां मौजूद कर्मी अनुप्रिया से जानकारी लेने पर ब्लीचिंग पाउडर की तत्काल उपलब्धता नहीं होने की बात सामने आई।

अर्पणा कुमारी ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव, स्वास्थ्य शिविर, साफ-सफाई, सुरक्षित पेयजल और आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की।

प्रधानमंत्री को भेजे पत्र का भी किया उल्लेख

अर्पणा कुमारी ने बताया कि उन्होंने 15 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में भी विक्रमशिला सेतु और राघोपुर क्षेत्र की स्थिति के साथ पूर्व विभागीय निरीक्षणों एवं उपलब्ध पत्राचार का उल्लेख किया है।

उनके अनुसार, पत्र में वर्ष 2023 की विभागीय कार्यवाही से लेकर वर्ष 2025-26 के निरीक्षण एवं पत्राचार तथा अगस्त 2026 में उत्पन्न परिस्थितियों का क्रमवार उल्लेख करते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय समीक्षा की मांग की गई है।

हाईकोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच की मांग

अर्पणा कुमारी ने राघोपुर कटाव और विक्रमशिला सेतु क्षेत्र से जुड़े पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के किसी माननीय न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति गठित कर वर्ष 2023 से अब तक हुए निरीक्षण, विभागीय पत्राचार, प्रस्तावित सुरक्षा कार्यों, स्वीकृति और क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा की जानी चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके अनुसार जांच का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि तथ्यों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना तथा भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करना होना चाहिए।

“राहत के साथ स्थायी समाधान जरूरी”

अर्पणा कुमारी ने कहा कि राघोपुर में पानी कम होने के बाद भी संकट पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। उनके मुताबिक तत्काल राहत के साथ-साथ क्षेत्र की दीर्घकालिक नदी सुरक्षा पर भी काम जरूरी है।

उन्होंने वैज्ञानिक Hydrological एवं Morphological Study, Guide Bund, River Training Work, मजबूत तटबंध और आवश्यक pitching सहित दीर्घकालिक नदी सुरक्षा योजना तैयार कर उसे लागू करने की मांग की।

उन्होंने केंद्र और बिहार सरकार से राघोपुर-विक्रमशिला सेतु क्षेत्र का स्वतंत्र तकनीकी अध्ययन कराने, पूर्व में प्रस्तावित Guide Bund एवं River Training Work की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करने तथा प्रभावित लोगों की सुरक्षा के लिए तत्काल राहत के साथ दीर्घकालिक सुरक्षा कार्य सुनिश्चित करने की मांग की।

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