नवगछिया में बाढ़-कटाव का संकट, सत्ता के मंत्री मैदान में लेकिन विपक्ष कहां ?
नवगछिया में बाढ़ और कटाव के बीच सत्ता पक्ष के मंत्री मैदान में हैं, लेकिन विपक्ष की सक्रिय भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। जनता मांग रही स्थायी समाधान।

नवगछिया अनुमंडल के बिहपुर और गोपालपुर विधानसभा क्षेत्रों में इन दिनों बाढ़ और गंगा-कोसी के कटाव का संकट सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। राघोपुर समेत कई इलाकों में कटाव और बाढ़ की स्थिति ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। काजीकोरैया–राघोपुर बांध को हुए नुकसान के बाद आसपास के इलाकों में भी चिंता बढ़ी हुई है।
ऐसे समय में प्रभावित लोगों की मांग स्पष्ट है—हर साल होने वाली फ्लड फाइटिंग के बजाय बाढ़ और कटाव का स्थायी समाधान।
मैदान में सत्ता पक्ष के मंत्री
बिहपुर के विधायक कुमार शैलेन्द्र बिहार सरकार में पथ निर्माण मंत्री हैं, जबकि गोपालपुर के विधायक शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ऊर्जा मंत्री हैं। बाढ़ और कटाव की मौजूदा परिस्थितियों के बीच दोनों जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और क्षेत्र में अधिकारियों के साथ स्थिति पर नजर बनाए रखने की कोशिशें चर्चा में हैं।
हालांकि, इसी बीच नवगछिया की राजनीतिक तस्वीर को लेकर एक अहम सवाल भी उठ रहा है—विपक्ष की सक्रिय भूमिका कहां दिखाई दे रही है?
यह सवाल किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की भूमिका को लेकर है।
संकट के समय विपक्ष की भूमिका पर सवाल
लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका केवल चुनाव के दौरान जनता के बीच पहुंचने तक सीमित नहीं होती। बाढ़, कटाव और विस्थापन जैसे गंभीर जनसरोकार के मुद्दों पर विपक्ष से अपेक्षा होती है कि वह प्रभावित लोगों की आवाज को सरकार और विधानसभा तक पहुंचाए, प्रशासन से जवाब मांगे और स्थायी समाधान के लिए सरकार पर लोकतांत्रिक तरीके से दबाव बनाए।
नवगछिया में मौजूदा बाढ़-कटाव संकट के बीच यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि प्रभावित जनता खुद सड़क से लेकर बांध तक अपनी समस्याओं को सामने रख रही है।
जनता खुद आवाज उठा रही है।
जनता खुद सवाल कर रही है।
जनता खुद स्थायी समाधान की मांग कर रही है।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि नवगछिया की विपक्षी राजनीति इस संकट के दौरान कितनी प्रभावी तरीके से जनता के साथ खड़ी दिखाई दे रही है?
जनता को चाहिए स्थायी समाधान
बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की मांग केवल तत्काल राहत या फ्लड फाइटिंग तक सीमित नहीं है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से मजबूत तटबंध, कटावरोधी संरचनाओं और वैज्ञानिक तरीके से स्थायी सुरक्षा उपायों की मांग उठती रही है।
लोग चाहते हैं कि संवेदनशील स्थानों पर जरूरत के मुताबिक शीट पाइलिंग, मजबूत तटबंध, कटावरोधी कार्य और दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन योजना पर काम हो, ताकि हर साल मानसून के दौरान वही संकट दोबारा सामने न आए।
सत्ता और विपक्ष—दोनों की जरूरत
मौजूदा हालात में सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी जहां प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक और सरकारी मशीनरी के साथ राहत एवं सुरक्षा कार्यों को गति देने की है, वहीं विपक्ष की जिम्मेदारी सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने और जनता की समस्याओं को मजबूती से उठाने की भी है।
मजबूत लोकतंत्र के लिए मजबूत सरकार के साथ सक्रिय और जवाबदेह विपक्ष भी जरूरी है।
चुनाव के समय सक्रिय होने वाली राजनीति और संकट के समय जनता के बीच खड़े होने वाली राजनीति में बड़ा अंतर होता है। बाढ़ और कटाव जैसी आपदा के समय जनता यह देखती है कि उसके साथ कौन खड़ा है और उसकी आवाज को कौन आगे बढ़ा रहा है।
पत्रकार की नजर से सबसे बड़ा सवाल
एक पत्रकार के तौर पर सवाल किसी दल की प्रशंसा या आलोचना का नहीं, बल्कि जनता के मुद्दे को सामने रखने का है।
नवगछिया की जनता के सामने आज सबसे बड़ा सवाल यही है—
बांध हर साल कमजोर क्यों पड़ते हैं?
कटाव का स्थायी समाधान कब होगा?
बाढ़ से प्रभावित लोगों को दीर्घकालिक सुरक्षा कब मिलेगी?
और संकट के समय जनता की आवाज को मजबूती से उठाने वाला विपक्ष कहां है?
नवगछिया को केवल सत्ता नहीं, बल्कि सवाल पूछने वाला, जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाने वाला और सरकार को जवाबदेह बनाने वाला सक्रिय विपक्ष भी चाहिए।
क्योंकि लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका है। अंततः राजनीतिक बहस का केंद्र जनता और उसका हित ही होना चाहिए।
— रौशन सनगही
स्वतंत्र पत्रकार एवं संपादक, इंक़लाब इंडिया



