तेरी आशिकी में जाना तुम्हें गजल लिख रहा हूं
तेरी आशिकी में जाना तुम्हें गजल लिख रहा हूं।तेरी सूरत को सारे सहर में वज्म में लिख रहा हूं। दिल…
Read More »कविता
पिता जी ठीक कहते थे,कविता से पेट नहीं भरता। गोल, चौकोर या तिकोनी,थोड़ी जली हुई भी चलेगी,पेट भरता है बस रोटी…
Read More »मुक्तक
जगत दीवाना चाम का और दाम का। कोई दीवाना पद प्रतिष्ठा नाम का। हर कोई दुनिया में दीवाना दिखता। कोई…
Read More »मन किसी अज्ञात पीड़ा
मन किसी अज्ञात पीड़ामें चेतनाशून्य हो गया थामन का अंधकार रात्रिके उस गहनअंधकार में छटपटा रहा थाउस सूर्योदय कीप्रतीक्षा मेंअपार…
Read More »लग रहा ये मंज़र भी गज़ब का ख़ूबसूरत है जो तू संग मेरे है
लग रहा ये मंज़र भी गज़ब का ख़ूबसूरत है जो तू संग मेरे है।शब्दों के जाल में कहीं उलझ ना…
Read More »नूर ए ख़ुदा हो
फ़िक्र कि रात में तुम सुकूँन कि नींद हो।चाँद से भी ज़ियादा मेरे नूर-ए-खुदा हो। चाहे किसीभी ख़याल के साथ…
Read More »निश्छल स्त्री और प्रेम
पुरुषों को प्रेम के लिएहमेशा जतन करने पड़ेउसने युद्ध तोबहुत सारे जीतेपर स्त्री का मनकभी जीत नहीं पाया श्रेष्ठता प्राप्त…
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साहित्य

नख शिख वर्णन
एक रुपसि है अति सुन्दर ,विधि ने उसे सजाया है ,सर से लेकर पांव के नख तक ,फुर्सत मे ही…
Read More » गजल
नहीं है मंजिल दूर,कुछ कदम, चल कर तो देखो,अपने लिए ही सही,खुद को, बदल कर तो देखो। हर रिश्ता,हर शख्स…
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साहित्य

कुछ गुनगुनाएँ
प्रेम मुस्काना नहीं तो , तुम कहो यह और क्या है ।यदि नहीं है सार नारी , तो कहो यह…
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