बिहार में इस साल नहीं होंगे पंचायत चुनाव, परिसीमन के बाद 2027 में मतदान की संभावना

पटना। बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर इस बार तस्वीर बदलती नजर आ रही है। मौजूदा पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2026 में पूरा होने के बावजूद इस वर्ष चुनाव कराए जाने की संभावना कम है। सरकार पहले पंचायतों के परिसीमन की प्रक्रिया पूरी कराने की तैयारी में है। इसके बाद वर्ष 2027 में पंचायत चुनाव कराए जाने की संभावना जताई जा रही है।
बिहार में पिछला पंचायत चुनाव 2021 में हुआ था। सितंबर से दिसंबर के बीच कई चरणों में हुए इस चुनाव में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद समेत पंचायती राज संस्थाओं के विभिन्न पदों के लिए मतदान कराया गया था।
परिसीमन के बाद बदलेगा पंचायतों का स्वरूप
आगामी चुनाव से पहले पंचायतों का परिसीमन कराया जाएगा। इसके लिए वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाना है। आबादी के आधार पर पंचायतों और वार्डों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जाएगा।
परिसीमन की प्रक्रिया के लिए सरकार की ओर से करीब तीन करोड़ रुपये की राशि जारी किए जाने की जानकारी है। पूरी प्रक्रिया में लगभग छह महीने या उससे अधिक समय लगने का अनुमान है। परिसीमन पूरा होने के बाद मतदाता सूची, मतदान केंद्रों और आरक्षण रोस्टर को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया होगी।
कई पंचायतों की बदल सकती है सीमा
नए परिसीमन में कई पंचायतों की सीमाओं में बदलाव संभव है। आबादी और प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर नए वार्ड बनाए जा सकते हैं। वहीं, कुछ क्षेत्रों में नई पंचायतों के गठन की संभावना भी है।
इस बदलाव का सीधा असर पंचायत प्रतिनिधियों के पदों की संख्या पर पड़ेगा। खासकर मुखिया पदों की संख्या में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
करीब 13 हजार तक हो सकते हैं मुखिया के पद
फिलहाल बिहार में लगभग 8,053 मुखिया पद हैं। परिसीमन और आबादी के नए आकलन के बाद इनकी संख्या बढ़कर करीब 13 हजार तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो आगामी पंचायत चुनाव में मुखिया पद के लिए दावेदारों की संख्या भी काफी बढ़ सकती है।
नए सिरे से तैयार होगा आरक्षण रोस्टर
परिसीमन के बाद पंचायतों में आरक्षण व्यवस्था का भी नए सिरे से निर्धारण किया जाएगा। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण नए आधार पर होगा।
इससे कई पंचायतों में मौजूदा सामान्य सीट आरक्षित हो सकती हैं और आरक्षित सीटें सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित हो सकती हैं। लिहाजा संभावित उम्मीदवारों की राजनीतिक तैयारियों पर भी इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है।
2027 में चुनाव की तैयारी की संभावना
बिहार में पंचायत चुनाव फिलहाल दलीय आधार पर नहीं कराए जाते हैं। हालांकि राजनीतिक दल समय-समय पर पंचायत चुनाव को दलीय आधार पर कराने की मांग उठाते रहे हैं।
अब सभी की नजर परिसीमन की प्रक्रिया, नए आरक्षण रोस्टर और सरकार के आगामी निर्णय पर है। यदि निर्धारित प्रक्रिया में समय लगता है तो 2026 के बजाय 2027 में पंचायत चुनाव कराए जाने की संभावना मजबूत हो सकती है।



