साहित्यकविता कानन

बालिका दिवस

माँ मै तेरी बेटी नही
बेटा ही हूँ
तू घबराना नही
तेरा साथ निभाऊंगी
मुझे भूण में मत करों खत्म
मै बोझ नही सहारा बनूंगी
माँ जमाने से मत डर
हम दोनों एक दूजे की हिम्मत
बन सबसे लड जाएंगे
तू डरती है न तेरी फूल सी
कली को कोई तोड़ देगा
मै फूल नही हथियार बनूंगी
कोई मसल न पाएंगा
देख माँ तू मेरी ढाल बन
मै युद्ध विजयी कर जाऊंगी
बेटा कुल को आगे बढाता है
मै तेरा कुल चमकाऊंगी
माँ सच कहती हूँ मैं
तेरी शान बढाऊंगी।।

पिताजी आप मत होना
उदास बोझ न बनूंगी मै
मै खुद अपने पैरों मै
होकर खडी
मिलकर बोझ तेरा बांटूगी
तेरा बन के ही बेटा मै
जीवन अपना काटूंगी
चिंता न करना मेरी शादी की
ऐसा मुकाम हासिल करूंगी
खुद तेरे पास चलकर
हाथ फैला लोग माँगेंगे
आप फिर घंमड से कहना
मेरा बेटा तू मेरी शान है
सिर उठाकर चलना
कहना मेरी अभिमान है।।

बेटा और बेटी में
मत करना भेद
दोनो को एक नजर से
देखना तुम
मेरी भी चाहत है
मुझे भी है बहुत पढना
आसमान में है ख्वाहिश उडने की
आजाद पंछी की भाँति है उडना
गगनचुंबी में पहुंचकर गगन को
छूने की है मेरी चाहत
माँ-बापू बनूंगी तेरा अभिमान
करूंगी न कभी आपको आहत।।
जगदीश कौर
प्रयागराज इलाहाबाद

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