साहित्यकविता कानन

हाजिर जवाबी अटल बिहारी

देश की माटी ने दी सदा
अमूल्य तोहफ़ा निशानी
वीरता के परचम को
लहराते रहे हैं बलिदानी
उन्हीं श्रेणी में लिखा है
नाम अटल बिहारी का
कवि ह्रदयावरण के थे
सतत् सेवा में रत रहे
एक बार की है किस्सा
बस की सवारी करके
अटल पाकिस्तान गये
वहाँ की जन सत्ता ने
तहे दिल स्वागत किये
हँसी ठिठोली चल पड़ी
लड़की पत्रकार बोली
आपभी हो कुँवारा जी
कब से तेरी आस में हूँ
करो मुझसे शादी जी
मुँह दिखाई में हमको
देना कश्मीर घाटी जी
अटल जी ने झट बोला
दहेज में हमें चाहिए
पाकिस्तानी वादी जी
कर लूँगा मैं शादी जी।
डॉ. इन्दु कुमारी
मधेपुरा बिहार

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