हजारीबाग। आमतौर पर लोग सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति की राह चुनते हैं, लेकिन झारखंड के हजारीबाग जिले से एक अलग तस्वीर सामने आई है। गोरिया करमा पंचायत की मुखिया कुमारी मीरा ने (JSSC) द्वारा आयोजित प्रशिक्षित सहायक आचार्य भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल की है। दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने और नियुक्ति पत्र मिलने के बाद उन्होंने मुखिया पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है।
कुमारी मीरा का कहना है कि मुखिया का पद उनके परिवार की राजनीतिक विरासत का हिस्सा रहा है, लेकिन सहायक आचार्य का पद उन्होंने अपनी मेहनत और योग्यता के बल पर हासिल किया है। ऐसे में अब वे शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देना अधिक उचित मानती हैं।
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले की चर्चा है, क्योंकि अक्सर शिक्षक, पुलिसकर्मी या अन्य सरकारी कर्मचारी चुनाव लड़ने के लिए नौकरी छोड़ देते हैं। इसके उलट कुमारी मीरा ने सरकारी शिक्षक बनने के लिए मुखिया पद छोड़ने का फैसला किया है, जो एक अलग उदाहरण माना जा रहा है।
हालांकि अभी उन्हें केवल नियुक्ति पत्र मिला है और नियमानुसार उनके पास शिक्षक पद स्वीकार नहीं करने का विकल्प भी है। यदि वे चाहें तो नियुक्ति का परित्याग कर मुखिया बनी रह सकती हैं। लेकिन उनके फैसले ने सरकारी नौकरी के प्रति युवाओं के बढ़ते आकर्षण और उसकी अहमियत को भी उजागर किया है।
सरकारी नौकरी के सीमित अवसरों के दौर में यह निर्णय चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि कुमारी मीरा अंतिम रूप से शिक्षक का पद ग्रहण कर शिक्षा के क्षेत्र में नई पारी शुरू करती हैं या भविष्य में फिर राजनीति की ओर लौटती हैं।

